रात की वो दिल्ली की धूप; सुकून भवावे;
रात की वो दिल्ली की धूप; सुकून भवावे;
2Kفالو کریں
4.52Kفینز
47.13Kلائکس حاصل کریں
She lies in morning mist on temple steps—did you feel this too? A quiet poem of blue linen and falling hair, whispered in stillness.
इस तरह की सुंदरता को क्या फ़िल्टर करेगा? जब सुबह की हवा में नीले कपड़ की परछाईं झूमती हैं… मैंने सोचा ‘मुझे पढ़ने’ कोई माँग? नहीं। मैंने सिर्फ़ ‘साँस’ पकड़ी।
अभी-फिल्टर वाले Instagram पर 10K like? हाँ! पर 10K सुबह-वाला सुकून? हज़ारों।
आज मैंने अपनी पट्टियाँ पोखकर…और मैं हँसती हूँ।
आपको क्या महसूस हुआ?
469
66
0
2025-11-09 12:29:08
ذاتی تعارف
मैं दिल्ली के एक कोने में रहती हूँ, जहाँ हर सुबह का पहला किरण सिर्फ़ मेरी कैमरा देखता है। मैं प्रत्येक सामान्य पल को एक सुंदर कथा में बदलती हूँ —— पगड़ी, हथेल, मुखड़ा... मेरे प्रति सभी कोई ‘अच्छय’ महसूस होता है। मुझे ज़्यादा से ‘खूबस’ नहीं, ‘आवाज’चाहिए। मुझसे प्रश्न: 'आपको कब, कब? ' ——जवाब: 'मुझे'।

